गुप्तचर

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(रघुवंशनाथम् भाग-11) - LATEST

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गुप्तचर, ईशान महेश द्वारा रचित आध्यात्मिक उपन्यास, रघुवंशनाथम्का ग्यारवां खंड है।

Guptchar, Raghuvanshnatham Part-11 गुप्तचर आध्यात्मिक उपन्यास में इस बात को बहुत गहराई से दर्शाया गया है कि जब राम वानर सेना सहित लंका के सागर तट पर थे, तब जितने भी गुप्तचर भेजे गए; वे सभी रावण की तरफ से थे। राम की तरफ से केवल शांति-दूत भेजे गए। यह उपन्यास रावण की गुप्तचर-व्यवस्था तथा रावण के कुत्सित चिंतन को उजागर करता है। रावण ने कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि वनवासी राम दुस्तर सागर पर पुल बाँध कर; परम सुरक्षित उसकी सोने की लंका की घेराबंदी करके, उसे अकल्पनीय महान संकट में डाल देगा और वह भी वानर-सेना के द्वारा। रावण का राम पर तो कोई बस नहीं चलता; इसलिए वह सीता को यातना देने के लिए मायावी कुचक्र रचता है और सीता के मन पर भयंकर चोट पहुँचाता है। उस चोट के प्रभाव से सीता अपना मानसिक संतुलन खो बैठती है। सीता की रक्षा और सेवा में नियुक्ति कशा नाम की राक्षसी के माध्यम से राम स्वयं अदृश्य रूप में आकर सीता को चेताने का बहुत प्रयास करते है; किंतु वे सफल नहीं हो पाते।